यूपी के 115 राजनीतिक दलों पर गिरी गाज, चुनाव आयोग ने सूची से किया बाहर,
वजह जानकर चौंक जाएंगे आप
21 days ago
Written By: Ashwani Tiwari
Election Commission: उत्तर प्रदेश के राजनीतिक परिदृश्य में बड़ा बदलाव करते हुए भारत निर्वाचन आयोग ने 115 राजनीतिक दलों को अपनी आधिकारिक सूची से हटा दिया है। यह कदम उन दलों के खिलाफ उठाया गया है, जिन्होंने 2019 से अब तक किसी भी लोकसभा या विधानसभा चुनाव में हिस्सा नहीं लिया। आयोग के इस फैसले के बाद ये दल अब सरकारी लाभ, चुनाव चिह्न और वित्तीय छूट जैसे अधिकारों से वंचित हो जाएंगे। इस कार्रवाई को चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और सक्रियता लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
निष्क्रिय दलों के लिए झटका
भारत निर्वाचन आयोग ने साफ किया है कि केवल वे राजनीतिक दल ही पंजीकृत रहेंगे, जो नियमित रूप से चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा लेते हैं। सूची में दर्ज होने से दलों को चुनाव चिह्न का उपयोग, सरकारी सहायता और कर संबंधी छूट जैसे फायदे मिलते हैं, लेकिन अब इन 115 दलों को यह सब अधिकार नहीं मिलेगा। इससे उनके राजनीतिक अभियान और संगठनात्मक कामकाज पर सीधा असर पड़ेगा।
अपील करने का दिया अवसर
हालांकि, आयोग ने प्रभावित दलों को 30 दिनों के भीतर अपील करने का मौका दिया है। इस अवधि में वे अपना पक्ष रख सकते हैं और यह साबित करने की कोशिश कर सकते हैं कि वे सक्रिय हैं या भविष्य में चुनाव लड़ने की योजना रखते हैं। अपील के बाद ही तय होगा कि इनमें से किसी दल को दोबारा सूची में जगह मिलेगी या नहीं।
पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में कदम
निर्वाचन आयोग ने इस कदम को राजनीतिक व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने और केवल सक्रिय दलों को ही सरकारी सुविधाएं देने के उद्देश्य से जरूरी बताया। आयोग का कहना है कि इस तरह की समीक्षा आगे भी समय-समय पर होती रहेगी, ताकि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और जवाबदेह बनी रहे।
राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव की संभावना
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निर्णय से उत्तर प्रदेश की राजनीति में छोटे और निष्क्रिय दलों का प्रभाव घटेगा। वहीं, सक्रिय दलों को अपने संगठन और चुनावी तैयारियों को मजबूत करने का मौका मिलेगा। यह कदम न केवल चुनावी प्रतिस्पर्धा को स्वस्थ बनाएगा, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को भी मजबूती देगा।