अब जूनियर इंजीनियर से भिड़े ऊर्जा मंत्री एके शर्मा, जनप्रतिनिधि से अभद्रता पर फिर गरजे,
जानिए इस बार क्यों भड़के
25 days ago
Written By: Ashwani Tiwari
UP Energy Minister AK Sharma: उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया गया है। हरगांव विद्युत उपकेंद्र के जूनियर इंजीनियर (JE) रमेश मिश्रा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने राज्य सरकार में कारागार राज्यमंत्री सुरेश राही के साथ अभद्र व्यवहार किया। यह विवाद तब हुआ जब मंत्री हरगांव क्षेत्र में खराब ट्रांसफार्मर की समस्या पर जानकारी लेने पहुंचे थे। इस तकनीकी गड़बड़ी से आम जनता परेशान थी और बिजली आपूर्ति बाधित हो रही थी।
ऊर्जामंत्री ने जताई कड़ी नाराजगी
इस मामले में प्रदेश के ऊर्जामंत्री ए.के. शर्मा ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर स्पष्ट शब्दों में नाराजगी जाहिर की। मंत्री शर्मा ने लिखा कि राज्य सरकार में माननीय राज्यमंत्री श्री सुरेश राही जी के साथ सीतापुर जिले के विद्युत विभाग के हरगांव के जूनियर इंजीनियर द्वारा अविवेकपूर्ण व्यवहार बिल्कुल स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने JE पर न केवल मंत्री से गलत व्यवहार का आरोप लगाया, बल्कि जनता की समस्याओं के प्रति असंवेदनशीलता और कार्य में लापरवाही का भी दोषी ठहराया।
ऊपर से नीचे तक जवाबदेही तय
ऊर्जामंत्री ने यह भी बताया कि उन्होंने खुद मंत्री सुरेश राही से बात की है और उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के चेयरमैन और मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) के प्रबंध निदेशक (MD) को सख्त निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में केवल JE नहीं, बल्कि पूरे विभागीय ढांचे की लापरवाही सामने आई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तरह की घटनाएं भविष्य में दोहराई न जाएं, इसके लिए पूरे सिस्टम को दुरुस्त किया जाएगा।
जनप्रतिनिधियों के साथ दुर्व्यवहार पर चेतावनी
ऊर्जामंत्री ए.के. शर्मा ने सभी विद्युत कर्मियों को साफ चेतावनी दी कि अगर वे जनता की भावनाओं की अनदेखी करेंगे या जनप्रतिनिधियों से असभ्य व्यवहार करेंगे, तो उसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होंने कहा कि सभी कर्मियों को पुनः चेताया जाता है कि वे अपने कर्तव्यों का पूरी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता से निर्वहन करें।
संदेश साफ है – लापरवाही नहीं चलेगी
JE रमेश मिश्रा पर की गई यह कार्रवाई केवल एक कर्मचारी के निलंबन की बात नहीं है, बल्कि यह सरकार की ओर से एक सख्त संदेश भी है। इससे यह स्पष्ट होता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार न केवल जनता की समस्याओं को लेकर गंभीर है, बल्कि जनप्रतिनिधियों के सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी पूरी तरह सख्त है।