साड़ी में घूंघट ओढ़कर अखाड़े में उतरती हैं महिलाएं, पुरुषों को देखने तक की नहीं मिलती इजाज़त…
UP के इस गांव में होता है अनोखा दंगल
20 days ago
Written By: Ashutosh Dixit
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के लोदीपुर निवादा गांव में हर साल रक्षाबंधन के अगले दिन एक ऐसा अनोखा दंगल आयोजित होता है, जिसमें सिर्फ महिलाएं ही हिस्सा लेती हैं। घूंघट डालकर अखाड़े में उतरने वाली ये महिलाएं अपने दमखम और कुश्ती के दांव-पेंच से दर्शकों का दिल जीत लेती हैं। सैकड़ों साल पुरानी इस परंपरा में पुरुषों की पूरी तरह से एंट्री बैन रहती है। यहां तक कि निर्णायक से लेकर कमेंट्री तक, सभी भूमिकाएं महिलाएं ही निभाती हैं।
बुजुर्ग महिलाएं भी नहीं पीछे
रविवार को आयोजित इस महिला दंगल का शुभारंभ ग्राम प्रधान गिरजा देवी ने किया। इस मौके पर गांव की तमाम महिलाओं ने उत्साह के साथ अखाड़े में एक-दूसरे को पटकनी दी। खास बात यह रही कि बुजुर्ग महिलाएं भी पीछे नहीं रहीं और पूरे जोश से दांव-पेंच आजमाए।
कौन बनी विजेता
इस बार हुए मुकाबलों में रानी भुर्जी ने चंद्रप्रभा को हराया, गत्तो सविता ने प्यारी साहू को मात दी, जबकि मालती शुक्ला ने रामदेवी गुप्ता को हराया। विद्या ने संपत को चारों खाने चित्त किया और केसर देव ने कुंवर को शिकस्त दी। क्रांति पाल और रेखा पाल का मुकाबला बराबरी पर खत्म हुआ। कुल मिलाकर 20 से अधिक रोमांचक कुश्तियां हुईं, जिन्हें देखने के लिए सैकड़ों महिलाएं मौजूद थीं।
अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही परंपरा
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि यह परंपरा ब्रिटिश शासनकाल से चली आ रही है। उस समय अंग्रेजी फौज के अत्याचार से बचने के लिए गांव की महिलाओं ने कुश्ती के दांव-पेंच सीखे थे। पुरुष अक्सर छिप जाते थे, तो अपनी रक्षा खुद करने के लिए महिलाओं ने यह परंपरा शुरू की, जो आज तक जारी है।
सिर्फ गांव की महिलाएं लेती हैं भाग
इस दंगल में केवल गांव की महिलाएं ही हिस्सा लेती हैं, कोई बाहरी महिला इसमें शामिल नहीं होती। खास बात यह है कि प्रतिभागियों की उम्र 40 साल से अधिक होती है और विजेता महिलाओं को सम्मानित भी किया जाता है। ग्राम प्रधान गिरजा देवी के अनुसार, यह परंपरा न सिर्फ महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है बल्कि गांव की सांस्कृतिक धरोहर भी है।