वाराणसी में मोक्ष के लिए भी अब करना होगा इंतजार, गंगा की बाढ़ से डूबे घाट,
छत और गलियों में जल रही हैं चिताएं
25 days ago
Written By: Ashwani Tiwari
Uttar Pradesh News: देश की धार्मिक राजधानी कही जाने वाली वाराणसी इन दिनों बाढ़ की गंभीर समस्या से जूझ रही है। गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे न केवल घाट, बल्कि शहर की गलियों और सड़कों तक पानी भर गया है। इससे जनजीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति उन स्थानों की है जहां लोग अपनों की अंतिम विदाई देने आते हैं। मणिकर्णिका घाट, जिसे मोक्ष का द्वार माना जाता है, अब पूरी तरह पानी में डूब चुका है। शवों का अंतिम संस्कार अब घाट की छत पर किया जा रहा है।
छत पर हो रहे अंतिम संस्कार
बाढ़ के कारण मणिकर्णिका घाट का मुख्य दाह संस्कार स्थल जलमग्न हो गया है। इसके चलते अब शवों का दाह संस्कार घाट की छत पर किया जा रहा है। लेकिन वहां जगह सीमित होने की वजह से एक बार में सिर्फ 10 शवों का ही अंतिम संस्कार हो पा रहा है। इससे वहां आए लोगों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है—कभी-कभी 3 से 5 घंटे तक। गंगा का पानी घाट की गलियों तक पहुंच चुका है और शव लेकर छत तक पहुंचना भी अब आसान नहीं रहा। परिजन नाव से छत तक शव पहुंचा रहे हैं, जो बेहद कठिन और समय लेने वाला काम है।
दुकानदार वसूल रहे ज्यादा पैसा
तेलु चौधरी नामक व्यक्ति, जो अंतिम संस्कार के लिए शव लेकर पहुंचे थे, ने बताया कि घाट पर बैठने की जगह तक नहीं है। लकड़ियां भीग गई हैं, जिससे दाह संस्कार में ज्यादा समय लग रहा है। साथ ही कई दुकानदार इस आपदा का फायदा उठाकर लकड़ी और अन्य जरूरी सामानों के दाम बढ़ा रहे हैं, जिससे आम लोगों पर आर्थिक बोझ भी बढ़ गया है।
लकड़ी व्यापारियों और स्थानीय लोगों की भी परेशानी
लकड़ी बेचने वाले सुनील साव ने बताया कि गलियों में भरे पानी के कारण लकड़ियों को छत तक पहुंचाना कठिन हो गया है। अब नावों से माल ढोना पड़ता है, जिससे लागत भी बढ़ी है और काम में देरी भी हो रही है। दूसरी ओर, हरिश्चंद्र घाट की स्थिति भी कम गंभीर नहीं है। वहां चिताएं अब गलियों में सजाई जा रही हैं। जगह की कमी के कारण वहां भी एक बार में सिर्फ तीन शवों का अंतिम संस्कार हो पा रहा है। गलियों में जलती चिताओं से स्थानीय लोगों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हर साल आती है यही विपदा
डोमराजा परिवार से जुड़े विक्रम चौधरी ने बताया कि हर साल बाढ़ के समय मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाटों पर यही हालत हो जाती है। अब जब घाटों के नए निर्माण की योजना बनाई जा रही है, तो लोगों को उम्मीद है कि आगे चलकर ऐसे समय में कम से कम इस तरह की समस्याओं से राहत मिल सकेगी।