ऊर्जा मंत्री के सम्मान में विद्युत संविदा संगठन मैदान में,
संघर्ष समिति के आरोपों को बताया राजनीतिक मकसद से प्रेरित
1 months ago
Written By: विनय के. सिंह
ऊर्जा मंत्री पर संघर्ष समिति द्वारा लगाए गए आरोपों को विद्युत संविदा कर्मचारी महासंघ उत्तर प्रदेश ने राजनीति से प्रेरित बताते हुए कड़ा विरोध जताया है। इस संबंध में महासंघ के सभी घटक संगठनों की एक वर्चुअल बैठक सोमवार को आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ श्रमिक नेता एवं महासंघ अध्यक्ष श्री आर.एस. राय ने की।
बयान की हुई आलोचना
बैठक में महासंघ के प्रमुख पदाधिकारियों ठाकुर भूपेंद्र सिंह, मोहम्मद काशिफ, नवल किशोर सक्सेना, पुनीत राय, दिनेश सिंह भोले, विनोद कुमार, राम भूल सैनी, अमित खारी, एस.सी. बहादुर और मीडिया प्रभारी विमल चंद्र पांडे ने भाग लिया और एक सुर में संघर्ष समिति के बयान की आलोचना की।
बयान साजिश का हिस्सा
महासंघ का कहना है कि यह बयान पूर्व नियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा है, जिसका मकसद ऊर्जा मंत्री और विभाग की छवि को धूमिल करना है। महासंघ अध्यक्ष श्री आर.एस. राय ने कहा कि वर्ष 2023 में भी ऐसा ही एक राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया था, जब 16, 17 और 18 मार्च को संघर्ष समिति द्वारा बिना किसी ठोस कारण के तीन दिवसीय हड़ताल करवाई गई थी। उस हड़ताल का नतीजा यह हुआ कि करीब 5000 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। श्री राय के अनुसार, वह हड़ताल ऊर्जा मंत्री और तत्कालीन अध्यक्ष श्री एम. देवराज (IAS) जैसे ईमानदार अधिकारियों को पद से हटाने की साजिश थी।
कर्मचारी हित की रक्षा के लिये एकजुट रहेंगे संगठन
महासंघ प्रभारी पुनीत राय ने भी आंदोलन की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि निजीकरण के विरोध की आड़ में यह आंदोलन कुछ खास लोगों के राजनीतिक लाभ का माध्यम बन चुका है, न कि संविदा कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का। बैठक के अंत में मीडिया प्रभारी श्री विमल चंद्र पांडे ने जानकारी दी कि महासंघ के सभी घटक संगठनों ने संकल्प लिया है कि वे कर्मचारियों के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए एकजुट रहेंगे और किसी भी राजनीतिक चाल को सफल नहीं होने देंगे।