वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर की खासियत, साल में सिर्फ एक ही दिन होती है मंगला आरती,
जानें पूरी कहानी
21 days ago
Written By: Ashwani Tiwari
Vrindavan Banke Bihari Temple: वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर न केवल इस पवित्र नगरी का सबसे प्रमुख मंदिर है, बल्कि इसकी धार्मिक महत्ता इतनी गहरी है कि बिना यहां दर्शन किए वृंदावन की यात्रा अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि श्री बांके बिहारी जी के दर्शन से भक्त के जीवन में प्रेम और भक्ति का भाव प्रबल हो जाता है। मंदिर का इतिहास, इसकी स्थापना और स्वामी हरिदास जी महाराज से जुड़ी घटनाएं इसे और भी विशेष बनाती हैं। यहां साल भर भक्तों की भीड़ रहती है, लेकिन मंगला आरती साल में केवल एक बार, जन्माष्टमी के दिन ही होती है।
मंदिर की स्थापना और इतिहास
मंदिर का निर्माण सन् 1864 में सभी गोस्वामियों के सामूहिक प्रयास से हुआ था। इससे पहले श्री बांके बिहारी जी की सेवा निधिवन में होती थी, जहां स्वामी हरिदास जी महाराज ने उन्हें प्रकट किया था। निर्माण के समय किसी बाहरी दानदाता का धन नहीं लिया गया। मंदिर, वृंदावन धाम के एक सुंदर इलाके में स्थित है और इसका हर कोना भक्तिभाव से ओत-प्रोत है।
स्वामी हरिदास जी का जीवन
स्वामी हरिदास जी का जन्म संवत 1536 में राजापुर गांव में भाद्रपद शुक्ल अष्टमी के दिन हुआ था। उनके पिता का नाम गंगाधर और माता का नाम चित्रा देवी था। वे स्वामी आशुधीर देव जी के शिष्य थे, जिन्होंने उन्हें सखी ललिता जी का अवतार माना। बचपन से ही वे संसार से विरक्त थे और किशोरावस्था में गुरु से युगल मंत्र दीक्षा लेकर यमुना किनारे ध्यान-भजन में लीन हो गए।
स्वप्नादेश और विहार पंचमी
25 वर्ष की उम्र में उन्हें गुरु से विरक्तावेष मिला और वे निकुंज वन में प्रभु की लीलाओं का ध्यान करने लगे। यहीं उन्हें सपने में आदेश मिला और धरती से श्री बांके बिहारी जी की मनोहर मूर्ति प्रकट हुई। यह घटना मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी को हुई, जिसे आज भी विहार पंचमी के रूप में बड़े उत्साह से मनाया जाता है।
ट्रस्ट की स्थापना और आज की स्थिति
संवत 1975 में हरगुलाल सेठ जी को मंदिर की सेवा-संविधान का दायित्व सौंपा गया। उन्होंने श्री बांके बिहारी ट्रस्ट की स्थापना की, जो आज भी मंदिर की व्यवस्थाएं संभालता है। इतिहास में काला पहाड़ के हमलों के समय भी बांके बिहारी जी को कहीं और नहीं ले जाया गया, और आज भी यहां उनकी प्रेमपूर्वक सेवा और पूजा निरंतर होती आ रही है।