अल्फा बंदर कौन हैं, मथुरा की स्पेशल टीम कैसे करेगी इनकी पकड़,
जानें पूरी बात
20 days ago
Written By: Ashwani Tiwari
Uttar Pradesh News: धर्म नगरी चित्रकूट, जो भगवान श्रीराम की तपोस्थली मानी जाती है, आज भी वानरों की भारी संख्या के लिए प्रसिद्ध है। मान्यता है कि वनवास काल में जब श्रीराम चित्रकूट आए थे, तो बजरंगबली भी उनके साथ यहां पहुंचे थे। तभी से यह पावन धरती बंदरों का स्थायी ठिकाना बन गई। लेकिन समय के साथ इनकी संख्या इतनी बढ़ गई है कि अब ये रिहायशी इलाकों, मठ-मंदिरों और बाजारों में शरारतें कर लोगों को खूब परेशान कर रहे हैं। आए दिन इनके कारण लोगों के सामान का नुकसान, खाने की चीजें छीने जाने और काटने जैसी घटनाएं सामने आती हैं।
ट्री ब्रिज से जंगल का रास्ता
बंदरों की बढ़ती समस्या को हल करने के लिए वन विभाग ने एक अनोखी योजना बनाई है। रानीपुर टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक प्रत्यूष कुमार कटियार ने बताया कि बंदरों को जंगल की ओर भेजने के लिए ट्री ब्रिज का निर्माण कराया जाएगा। ये ट्री ब्रिज रिहायशी इलाकों और मठ-मंदिरों के आसपास खाली स्थानों पर लगाए जाएंगे, जो आपस में पेड़-रोड की तरह जुड़े होंगे और सीधे जंगल के रास्ते तक पहुंचेंगे। योजना का मकसद है कि बंदर इन ब्रिज का इस्तेमाल कर अपने असली घर यानी जंगल में लौट जाएं।
भोजन की उपलब्धता कम करने की योजना
इसके साथ ही, मठ-मंदिरों और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लोगों को जागरूक किया जाएगा कि वे अनावश्यक रूप से बंदरों को खाने-पीने की चीजें न दें। अधिकारियों का मानना है कि यदि भोजन की आसान उपलब्धता कम होगी, तो बंदर स्वाभाविक रूप से जंगल का रुख करेंगे।
आक्रामक बंदरों पर निगरानी
प्रत्यूष कुमार कटियार ने बताया कि जो बंदर आक्रामक होकर हमला करते हैं या काटते हैं, उनके लिए मथुरा से एक तकनीकी टीम बुलाई जाएगी। यह टीम बंदरों के झुंड में मौजूद अल्फा बंदर यानी नेता को पहचानने में मदद करेगी। ऐसे बंदरों को पकड़कर कुछ समय बाद जंगल में छोड़ा जाएगा। माना जाता है कि अल्फा बंदर के न रहने पर बाकी बंदर भी धीरे-धीरे जंगल की ओर चले जाएंगे।