सुप्रीम कोर्ट से क्यों भिड़े इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 जज, मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र,
जानें जस्टिस प्रशांत मामले में क्या है पूरा विवाद
23 days ago
Written By: Ashwani Tiwari
Supreme Court: देश की न्यायपालिका में इस समय एक बड़ा विवाद सामने आया है, जिसमें जज ने ही जज के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट के बीच टकराव अब खुलकर सतह पर आ गया है। मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस प्रशांत कुमार से जुड़ा है। कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनके खिलाफ सुनवाई के दौरान तल्ख टिप्पणी करते हुए बड़ा आदेश दिया था। अब इस आदेश के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट के 13 जज एकजुट हो गए हैं और मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अरुण भंसाली को पत्र लिखकर फुल कोर्ट बैठक बुलाने की मांग की है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश और विवाद की जड़
यह विवाद एक कमर्शियल डिस्प्यूट से संबंधित याचिका के दौरान खड़ा हुआ। याचिकाकर्ता शिखर केमिकल्स ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी, जिसे इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट की पीठ, जिसमें जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन शामिल थे, उन्होंने 4 अगस्त 2025 को हाईकोर्ट का आदेश पलटते हुए जस्टिस प्रशांत कुमार की न्यायिक टिप्पणी को अस्वीकार्य बताया। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता को सिविल उपाय अपनाने से रोकना और आपराधिक कार्यवाही की अनुमति देना सही नहीं है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि जस्टिस कुमार को आपराधिक मामलों की सुनवाई से हटाकर एक सीनियर जज के साथ डिवीजन बेंच में बैठाया जाए।
हाईकोर्ट जजों की आपत्ति और पत्र
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट के जजों में नाराजगी बढ़ गई। जस्टिस अरिंदम सिन्हा ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर कहा कि यह आदेश बिना नोटिस दिए पारित किया गया और इसमें संबंधित जज के खिलाफ कठोर टिप्पणियां की गईं। उन्होंने सुझाव दिया कि फुल कोर्ट बैठक बुलाई जाए और यह तय किया जाए कि प्रशांत कुमार को आपराधिक खंडपीठ से नहीं हटाया जाएगा, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट को हाईकोर्ट के प्रशासनिक कार्यों में दखल का अधिकार नहीं है। साथ ही उन्होंने आदेश की भाषा और लहजे पर भी आपत्ति जताने की बात कही। इस पत्र पर कुल 13 जजों ने हस्ताक्षर किए हैं।
जस्टिस प्रशांत कुमार के काम में बदलाव और आगे की सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 4 अगस्त को ही जस्टिस प्रशांत कुमार के काम में बदलाव कर दिया गया। अब 7 और 8 अगस्त को वे जस्टिस एमसी त्रिपाठी के साथ भूमि अधिग्रहण, विकास प्राधिकरण और पर्यावरण से जुड़े मामलों की सुनवाई करेंगे। पहले उनके पास जो आपराधिक मामले थे, उन्हें जस्टिस दिनेश पाठक को सौंप दिया गया है। इस बीच, जस्टिस प्रशांत कुमार से जुड़ा मामला अभी खत्म नहीं हुआ है और सुप्रीम कोर्ट ने इसे शुक्रवार के लिए फिर से सूचीबद्ध कर दिया है।