झोपड़ी से पक्के घर तक का सफर... योगी सरकार की योजना ने रूबी की बदल दी दुनिया,
जानें कितना है मासिक वेतन
1 months ago
Written By: Ashwani Tiwari
Uttar Pradesh News: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा शुरू किए गए जीरो पावर्टी अभियान का असर अब जमीन पर दिखने लगा है। इस योजना की पहली लाभार्थी लखनऊ के गोसाईगंज इलाके की रूबी हैं, जिनकी जिंदगी अब पूरी तरह बदल गई है। कभी झोपड़ी में रहने वाली रूबी अब कुछ महीनों में पक्के मकान में शिफ्ट होंगी। उनके पति राम सागर को भी नौकरी मिल गई है, जिससे अब घर की आर्थिक स्थिति बेहतर हो रही है। रूबी कहती हैं कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि ऐसा दिन देख पाएंगी, लेकिन योगी सरकार उनके लिए उम्मीद की किरण बनकर आई।
पक्के मकान का सपना हो रहा पूरा
गोसाईगंज के सिलौली गांव की रहने वाली रूबी झोपड़ी में जीवन बिता रही थीं, जहां बरसात में पानी टपकता था और गर्मी में छत तवे जैसी जलती थी। अब उनके लिए पक्के मकान का निर्माण तेजी से चल रहा है। सरकार की ओर से की जा रही इस मदद ने रूबी और उनके पति को नई उम्मीद दी है। निर्माण कार्य की निगरानी खुद मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि मकान की गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखा जा रहा है और अगले कुछ महीनों में मकान पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। रूबी के पति राम सागर को सरकार की मदद से एलएंडटी कंपनी में नौकरी मिली है, जहां वे 18 हजार रुपये मासिक वेतन पर कार्य कर रहे हैं। इससे परिवार की आय सुनिश्चित हो गई है और अब वे अपने बच्चों की बेहतर परवरिश कर पा रहे हैं। रूबी कहती हैं कि अब वे खुद को सुरक्षित और सम्मानित महसूस कर रही हैं।
जीरो पावर्टी अभियान का व्यापक असर
2 अक्टूबर 2024 को शुरू हुए इस अभियान का उद्देश्य राज्य में गरीबी पूरी तरह खत्म करना है। इस योजना के तहत अब तक 13.57 लाख परिवार चिन्हित किए जा चुके हैं और सालाना 1.25 लाख रुपये की पारिवारिक आय सुनिश्चित करने का लक्ष्य है। इसके लिए 250 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। हर गांव से 10 से 25 बेहद गरीब परिवारों को योजना में शामिल किया जा रहा है।
रूबी की कहानी बनी प्रेरणा
रूबी का कहना है कि उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनका भी एक दिन पक्का घर होगा, लेकिन सरकार की मदद से यह सपना साकार हो रहा है। उनकी कहानी उन लाखों परिवारों के लिए प्रेरणा है, जो आज भी गरीबी की मार झेल रहे हैं। योगी सरकार का यह अभियान न सिर्फ आर्थिक सहायता देता है, बल्कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास जैसी मूलभूत ज़रूरतों को भी पूरा करता है।